बुधवार, 6 अगस्त 2014

अद्भुत विश्वास


05 August 2014
23:45
-इंदु बाला सिंह

माँ का यह कैसा अद्भुत विश्वास है
जो बातें करती है सपने में
अपने दूरस्थ पुत्र से फोन में .......
हैलो ...हां हां खोल रही हूं दरवाजा |
यह कैसी आशा है
माँ की अपने उस पुत्र से
जो अपनी दुनियां में मगन है
क्यों नहीं जी पाती माँ
अपना जीवन
हो के मस्त
मित्रों में |
हैरान करता है
मुझे
यह स्त्री जीवन
जो कट जाती है अपनों से
अपने मर्द के मुंह फेरते ही
या
आँखें बंद करते ही |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें