05 August
2014
23:45
-इंदु बाला
सिंह
माँ का यह
कैसा अद्भुत विश्वास है
जो बातें
करती है सपने में
अपने
दूरस्थ पुत्र से फोन में .......
हैलो ...हां
हां खोल रही हूं दरवाजा |
यह कैसी आशा
है
माँ की अपने
उस पुत्र से
जो अपनी
दुनियां में मगन है
क्यों नहीं जी
पाती माँ
अपना जीवन
हो के मस्त
मित्रों में |
हैरान करता है
मुझे
यह स्त्री
जीवन
जो कट जाती है
अपनों से
अपने मर्द के
मुंह फेरते ही
या
आँखें बंद
करते ही |
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