06 August
2014
11:27
-इंदु बाला
सिंह
सड़क पे बगल
से गुजरते सांड ने
ऐसा हुर्मेटा
कि
गिर पड़े नाली
में
सत्तर वर्षीय
वृद्ध
पर
न छूटा
उनके
हाथ का समोसा |
घर आये थे
वे
तो था हाथ
में
समोसे से भरा
प्लास्टिक
जिसे
उन्होंने नाली में गिरते ही
भींच लिया था
अपनी
छाती में ......
यह
जीवन संगिनी
प्रेम था
या
पैसों का
प्रेम
ना जानूं मैं
पर
इतना जानूं
जब वे
मरणासन्न सड़ते फोड़े संग पड़े थे
बिस्तर पे
तब
तरस गये थे वे
एक कम्बल के
लिये
जिसे
उनकी जीवन
साथिन ने सम्हाल कर रक्खा था
और
ओढती थी
हर जाडा में |
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें