12 August
2014
06:58
-इंदु बाला
सिंह
हाय
बाबुल
ने ढूंढा
वर ऐसा
जो
पढ़ ले मन की
बतियां
जब
पास आये
वो मेरे
बंद कर लूं
मैं अखियां .....
क्या सखि
.....पवन !
प्रकाश !
ना सखी
....कवि |
हाय
बाबुल ने
ढूंढा
वर ऐसा
मीन मेख
निकाले हरदम
जितनी बार मैं
चाय बनाऊ
मुआ
के मन न भावे
क्या सखि
....इंजीनियर !
ठेकेदार !
ना सखि
....मास्टर |
हाय
बाबुल ने
ढूंढा
वर ऐसा
लेफ्ट राईट
कराये पल पल
मन भावे मोहे
वो
मैं भी
करूंगी
लेफ्ट राईट उस
संग
देश के बार्डर
पे
क्या सखि
...फौजी !
हां सखि
..फौजी |
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