सोमवार, 11 अगस्त 2014

फौजी


12 August 2014
06:58
-इंदु बाला सिंह

हाय
बाबुल ने ढूंढा
वर ऐसा
जो
पढ़ ले मन की बतियां
जब
पास आये
वो मेरे
बंद कर लूं मैं अखियां .....
क्या सखि .....पवन !
प्रकाश !
ना सखी ....कवि |
हाय
बाबुल ने ढूंढा
वर ऐसा
मीन मेख निकाले हरदम
जितनी बार मैं चाय बनाऊ
मुआ
के मन न भावे
क्या सखि ....इंजीनियर !
ठेकेदार !
ना सखि ....मास्टर |
हाय
बाबुल ने ढूंढा
वर ऐसा
लेफ्ट राईट कराये पल पल
मन भावे मोहे
वो
मैं भी करूंगी 
लेफ्ट राईट उस संग
देश के बार्डर पे
क्या सखि ...फौजी !
हां सखि ..फौजी |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें