20 August
2014
07:07
-इंदु बाला
सिंह
स्कूल से
निकला मन
सड़क
की पुलिया पे बैठा सोंच रहा .........
सरकारी कालेज
में दाखिला न मिला उसे
क्या सरकारी
आफिस में
झाड़ूदार पिता
का पुत्र होना गुनाह है उसका
या
सवर्ण कुल में जन्म लेना
पचास वर्षीय
उसके पिता कब तक ढोयेंगे
परिवार का
बोझा
और
क्या अब वह पढ़
न सकेगा कालेज में कभी |
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