शुक्रवार, 1 अगस्त 2014

बेटी का मन दहाड़े


30 July 2014
13:04
-इंदु बाला सिंह

अच्छा हुआ माँ
तुमने बेटी कह कर पुकारा सदा
पर
न जाने
कैसे
समय ने
बेटा बना दिया मुझे
और
मैं तुमसे
पिता से
जग से
बेटे सरीखा व्यवहार
हक के लिये लड़ती रही
सेनानी बनी रही
आज भी
जिन्दा है सैनिक मेरे मन में
दहाड़ता रहता है
रुक रूक के |

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