24 August
2014
20:12
-इंदु बाला
सिंह
छपवाई मैंने
अपनी कहानी
की किताब
एक छात्र के
पापा से
दिया हर
छात्र को
दस किताब हर
छात्र को
अपने पापा के
हित मित्रों में बेचने को
और
हर उस छात्र
के गणित के कठिन प्रश्नों को हल करने में
सहायता की
बुला कर
उन्हें अपने घर में
जो
मेरी किताब के प्रकाशन से जुदा था |
वाह जी वाह !
कितना सरल था
मेरा काम
कहानी की
पुस्तक छपवा कर
नाम कमाना
पैसे कमाना
आखिर शिक्षक
हूं
कोई मामूली
जीव नहीं |
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