26 August
2014
15:35
-इंदु बाला
सिंह
चिट्ठी आई
थी
ननदरानी
की उसके नाम ......
रात को दस
बजे मेरी ट्रेन गुजरेगी तुम्हारे शहर से
मिलने
की इच्छा है
मेरी
और तुम्हारे ननदोई जी की तुमसे ........
न
चाहते हुये भी
न जाने किस
आस में
भाभी खड़ी रही
अपने पिता संग स्टेशन में
ट्रेन
आयी
पर सभी
खिडकियों के शटर बंद रहे
इक्के दुक्के
रेलयात्री चढ़ते और उतरते दिखे
पर न दिखी ननद
और
ट्रेन चल पड़ी
अपमानित भाभी को स्टेशन पे खड़ी छोड़ के |
अपने पिता संग
लौटी एक बेटी अपने मैके
एक अफसर से
हार के
दिन तारीख तो
मिट गये
स्मृति पटल से
पर
अंधियारी
रातों में कौंधते रहे
उस बेटी की
आँखों में
स्टेशन के वे
पल
क्योंकि
कुछ दिनों बाद
अपनी बहन की
स्टेशनवाली अफसरी सुन
अभावग्रस्त
भैय्या भी
मौन रह गये थे
|
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