गुरुवार, 4 सितंबर 2014

औरत तू पूजनीय है |


28 August 2014
22:27
-इंदु बाला सिंह

वाह री औरत !
क्या चीज है तू
पति की कमाई पे तेरा निर्णायक अधिकार नहीं था
और पति के न रहने पर भी  नहीं रहा
पति के आंख मूंदते ही सब  धन तेरे पुत्र के हाथ में चला गया
और तेरे हाथ में क्या रहा ?
चिंता न कर
हैं न तेरे पुत्र
जिनके लिए तू पत्थर है
पूजनीय है

वैसे घर में तो अब नास्तिकों की संख्या बढ़ रही है |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें