28 August
2014
22:27
-इंदु बाला
सिंह
वाह
री औरत !
क्या चीज है
तू
पति की कमाई
पे तेरा निर्णायक अधिकार नहीं था
और पति के न
रहने पर भी नहीं रहा
पति के आंख
मूंदते ही सब धन तेरे पुत्र के हाथ में
चला गया
और तेरे हाथ
में क्या रहा ?
चिंता न कर
हैं न तेरे
पुत्र
जिनके लिए तू
पत्थर है
पूजनीय है
वैसे घर में
तो अब नास्तिकों की संख्या बढ़ रही है |
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