सोमवार, 15 सितंबर 2014

उड़ प्रेम चिरई ! उड़


16 September 2014
05:17
-इंदु बाला सिंह

जिन्दगी
सिखाती है हमें
कहना
उड़ उड़ प्रेम चिरई !
और
उड़ जाती है हमारी चिड़िया कभी न लौटने को
एक दिन हम पाते हैं
जिनके लिये लड़े हम आजीवन
वे भी
पंख मजबूत होते ही
बना लिये अपना घोसला
चूजे भी तो बड़े होयेंगे
मौसम बदलेगा
यह सब जीवन युद्ध में
सेनानी को कभी महसूस नही होता |



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