गुरुवार, 4 सितंबर 2014

बेटी की अस्तित्वहीनता


28 August 2014
21:41
-इंदु बाला सिंह

समाज पुरुष को सर्वोपरि रखता है 
पिता पुत्र को मजबूत करता है अपना मकान  दे के 
पुत्र खुद रहता आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर
तो भला क्यूं न हो घर में पुरुष का शासन
तीनों गुणों से वंचित महिला
माँ या बड़ी बहन ही क्यों न हो
भला कैसे पाए घर में
निर्णय का अधिकार
मान सम्मान
घर की महिला को मिली आर्थिक आत्मनिर्भरता का फायदा भी तो
हजम कर लेता पुरुष |
सुन लड़की !
शक्ति दान में नहीं मिलती
पूरी ताकत लगा के अर्जित करनी पड़ती है 
युद्धस्तर में हर महिला को
जब तक निज प्रगति का  यह पाठ
न बांधेगी लड़की गाँठ में
तब तक
हर घर की बेटी
अस्तित्वहीन ही रहेगी
निज घर में |


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