31 August
2014
22:25
-इंदु बाला
सिंह
देखते देखते
बड़ा हो गया
घर का नीम
पेड़
इतना बड़ा पेड़
तो कटना चाहिये
पर
कोई राजी न
हुआ काटने को नीम का पेड़
मालूम हुआ
कोई
नहीं काटता नीम का पेड़
एक दिन आखिर
मिल ही गया एक आदिवासी आदमी
और कट गया नीम
का पेड़
मुक्ति मिली
हमें
उस बड़े पेड़ से
जो पत्ते गिरा कर गंदा करता था जमीन
एक साल बाद
वही आदमी
हमारे गेट पर
हाथ में बड़ा सा अल्युमिनियम का कटोरा ले खड़ा हुआ
तो रूह कांप
गयी एक पल को
वह भूखा था
भिखारी था
मजदूरों की
जीवन संध्या ऐसी होती होगी
सत्य
सुनने
और देखने में
अलग अलग अनुभूतियां होती हैं |
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