03
September 2014
07:07
-इंदु बाला
सिंह
वह मौन थी
और
घर का मालिक
चटखारे
ले ले के खा रहा था खाना ....
आहा
!
आज तो सब्जी
बड़ी स्वादिष्ट बनी है
वह
आश्चर्यचकित रह गयी
सुन के
प्रशंसा के बोल
याद आया उसे
अरे !
आज तो उसका
कलेजा टूट टूट के गिरा था खाने में
ओहो !
ये कलेजा भी
गजब की चीज होती है
जब तक सासें
चलती रहती हैं
तब तक
इसमें स्वत: मजबूत बन जाने का गुण
मौजूद रहता है |
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