गुरुवार, 4 सितंबर 2014

कलेजा


03 September 2014
07:07
-इंदु बाला सिंह

वह मौन थी
और
घर का मालिक
चटखारे ले ले के खा रहा था खाना ....
आहा !
आज तो सब्जी बड़ी स्वादिष्ट बनी है
वह आश्चर्यचकित रह गयी
सुन के प्रशंसा के बोल
याद आया उसे
अरे !
आज तो उसका कलेजा टूट टूट के गिरा था खाने में
ओहो !
ये कलेजा भी गजब की चीज होती है
जब तक सासें चलती रहती हैं
तब तक इसमें स्वत: मजबूत बन जाने का गुण मौजूद रहता है |

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