गुरुवार, 4 सितंबर 2014

माँ का सपना


02 September 2014
09:10
-इंदु बाला सिंह

क्या अम्मा !
आखिर तू कितना पढ़ीं है ये तो बता
भला क्यूँ पढ़ने को डांटती है तू मुझे हर दिन
मुझे न भाती ये किताबें
बड़ा मजा आये मुझे
तेरे संग कपड़ा धोने में .......
सजल नयनों से
गले लगाया माँ ने
अपने चार वर्षीय पुत्र को .....
ना बेटा ना
मेरा बेटा
बड़ा बनेगा
साहब जैसे प्लेन में उड़ेगा
ले के मुझको एक दिन |

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