28 August
2014
23:03
श्रोता और
लेखक
सदा बधें एक
अटूट बंधन में
एक बिना दूजा
उतना अस्तित्वहीन
जितना पेशेंट
के बिन डाक्टर
शिष्य
के बिन गुरु |
तो श्रोता
तुम महान हो
अपने वाह वाह
के पैसे वसूलो
श्रोता बनना
भी है एक कैरियर है
इसे
साईड एक्टिविटी बनाना बेहतर है
जिस गोष्ठी
में बुलाया जाय तुम्हें
पैसे अपने
अग्रिम ले
लेना तुम |
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