गुरुवार, 4 सितंबर 2014

मस्त जिये जाते हैं


30 August 2014
19:42
-इंदु बाला सिंह

तमीज पाकेट में रख
बनाते हैं समूह
और
बन जाते हैं  हम जंगल के जीव |
किसे गढ़ने की फुर्सत
पढ़ने की फुर्सत
वह जंगल
जहां जंगल में मंगल होता है
हम तो
बस जुबान की तलवार से
कंक्रीट के जंगल में
वार पे वार किये जाते हैं
तृप्त हुए जाते हैं
' सबल ही टिक सका है '
यह उक्ति सदा याद रख
हम आज में मस्त जिये जाते हैं |

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