गुरुवार, 24 जुलाई 2014

नींद नहीं तो सपने कैसे


23 July 2014
00:06
-इंदु बाला सिंह

घबरा उठता है जब मन
तो हम
तौलने लगते हैं
मन की पांखें
और
उड़ने को उत्सुक हो उठते हैं
बीते कल में
ढूंढने लगते हैं
अपनों की महक
पर
वे अपने भावहीन से
गुजर जाते हैं
हमारी आँखों के सामने से
हम
बस देखते रह जाते हैं
और
वर्तमान संग समझौते करते जाते हैं ...
नींद आये
तब न सपने देखें हम ...
सुना है
खुली आँखों के सपने सच नहीं होते |

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