30 June
2014
10:08
-इंदु बाला
सिंह
औरत
रोती है
दुःख
में ......
वो
औरत
औरत नहीं है
जो
रोना न जाने ...........
सुन
ओ
री पड़ोसन !
मान रखना है
समाज में
तो
रोना सीख
फिर
देखना
गली गली चर्चा
होगी
तेरी समस्याओं
की
सहानुभूति
मिलेगी तुझे
महिला बैठक
में
और
तेरा नाम भी
होगा .......
ओ री !
क्यूँ तू
हंसती रहती है
दुःख में भी
........
मुहल्ले की
औरतें
सान मटकी
करें
ठिठोली
करें ..........
देख
इसका न
जरूर
कोई यार है |
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