08 July
2014
15:33
-इंदु बाला
सिंह
सीढ़ी घर के
दो
तल्लों के बीच के प्लेटफ़ॉर्म पर
ठिठुरते जाड़ा
में
चिपचिपाती
गर्मी में
दुपहरी
में
शांत हो पढ़ते
थे
टांकते थे
अपनी कापी
में
पढाई के
मिनटों का हिसाब
और
रात में सोने
से पहले दे देते थे
तुम
अपनी माँ को
कभी आठ घंटे
तो कभी
दस घंटे की
पढाई का हिसाब
तब तो
तुमने
निष्काम छात्र कर्म किया था
पर
जब तुम एक
दिन
इंजीनियर बन
पी० एस० यू०
के अफसर की कुर्सी पर बैठे
तब
तुम्हारी
उपलब्द्धि पर
अश
कर बैठे रईस पड़ोसी
और
कितने ही दिल
कसमसा गये
इर्ष्या से
पर
तुमने तो एक
जोरदार छलांग लगा कर
अपने
अभावों की खाई
पार कर ही ली
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