मंगलवार, 8 जुलाई 2014

सिरचढ़ी सिरफिरी


28 June 2014
11:38
-इंदु बाला सिंह

ले आओ भई !
अब
अपने पूत के लिये खाना बनानेवाली
मैं तो न बनानेवाली
इस मुस्टंडे का खाना ........
माँ के मुंह से
इतना सुनते ही
कूद पड़ी सिरफिरी
अपने अजूबे सवाल से ....
और मेरे लिए
कमानेवाला कब आएगा ?
अरे !
तू न चिंता कर
जब तक
हम हैं
फिर तेरा भाई है न ..........
माँ के मुंह से
इतना सुनते ही
फिर कूदी अपने एक सिरदर्द सवाल के साथ .........
पड़ोस की आंटी
जब भी आती हैं
हमारे घर
क्यों कोसती रहती हैं
अपनी सास और ननद को .......
माँ अपनी सब्जी चलाने किचेन में चल दी .....
पिता अख़बार पढ़ने लगे
और
सरचढी सिरफिरी ने टी० वी० आन कर लिया |

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