20 July
2014
05:51
-इंदु बाला
सिंह
ओह पेड़
लीची और आम
के पेड़
तुम हो
प्यारे
मेरे साथी और
सहारे
तेरी डालियों
से मैं रस्सी बांधूं
उसपे कपड़े
सुखाऊं
झूला डालूं
तू मुझे
हरसाये
जीने को
आक्सीजन दे
तू मेरे हर
सुख दुःख का मूक गवाह
कितनी बातें
करता तू
मेरे मौन
मकान से
शायद
मूक की भाषा
मूक
ही समझे |
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