मंगलवार, 18 मार्च 2014

मन फगुआया

सुन री !
ओ सखि री !
देख फागुन आया
जिया महकाया
कोयल कूकी
दूर कहीं ..............
जिया मेरा हरसाया आज
चल झूला झूलें
उपवन में खेलें आँखमिचौनी
फूलों से खेलें हम आज होली .........
चल रंग लें
निज को मौसम के रंग में
होली खेलें
मन है फगुआया .........
घूंघट में
आज हर पराई नार लगे निज
चल छेड़ेंगे
पड़ोसी को आज |

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