शनिवार, 22 मार्च 2014

राजनीति या मौकापरस्ती


शोक में भी
राजनीति
कर ले प्यारे
ऐसा मौका फिर न मिलेगा ......
जब
सब शोकाकुल हों
तब
तोड़ना आसान है
विरोधी को ..............
संस्कार तो गया
चूल्हे भाड़ में
हम तो
आंख खोले
राजनीति के पालने में |

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