ओ रे !
सूरज
सुबह सबेरे
तू क्यों बन
जाए
लाल
कुरमुरा पराठा सा
मेरा मुन्ना
कलपे
देख तुझे
.............
भाग को कोसूं
मैं
जब तरसे
देख तुझे
ठुनके
न खाना चाहे
चाय रोटी
.............
मैं भी तुझसे
कम नहीं
सुन सूरज !
तेरे ही
गुन सीख बड़ी हुयी
मैंने भी
बर्तन पटक
पटक जोर जोर से
भगा दिया
घर में घुसता
दुर्भाग्य
और
लगा ताला घर
में
भेज दिया
मैंने
अपने मुन्ने
को स्कूल |
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