अंधेरे को
घुसते देख
घर में
उसने
कांच की खिड़की
बंद कर
पर्दे खींच
दिए
और
बल्ब का स्विच
आन कर दिया .............
मन अंधकार भी
तो दूर करना था
इसमें
कम्प्यूटर के
की बोर्ड ने सहायता की
अक्षरों की
कालिमा में
मन का अंधकार
उतर गया ............
अब वह
प्रसन्नचित था
टेबल से हॉट
काफी की चुस्की लेने लगा ........
उसकी
आंख के आगे
आनेवाले कल की
रूपरेखा उभरने
लगी |
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