मंगलवार, 18 मार्च 2014

उल्लू

ओह !
उल्लू !
कितने प्यारे
और
मासूम लगते हो तुम
तुम्हारी
बड़ी बड़ी गोल गोल ऑंखें
जग को उत्सुक निगाहों से परखें 
छुयें
मेरे दिल को
बड़ा अफ़सोस होय मुझे
उन मित्रों पर
जो
अपनी औलादों को
उल्लू कह कर कोसें |

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