युवती
मिल्कियत
होती है
पिता
, पति या पुत्र की ........
दुर्भाग्यशाली
नागरिक होती है
वह
समाज
में .................
गर
तीनों में से एक भी
गर न होय
जिस युवती का ..........
वह युवती
आजीवन कर्म
योगी
गुलाम
से भी बदतर हो जाती है ........
सब कुछ
देख
समझ बूझ
कर भी युवती
सपने बुनती है
क्यों कि
उसे
अपने कर्म पर
नहीं
ईश्वर की असीम
सत्ता के जादुई
पुस्तक में
लिखे
घूरे के दिन
भी फिरने पर
विश्वास रहता
है |
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