मंगलवार, 18 मार्च 2014

सुन पंछी




ओ रे !
पंछी रे !
तू कितना मनमोहक है ..........
तेरी उड़ान
मुझमें
नभ में उड़ने की प्रेरणा दे 
तू ने ये उड़ान कहां से सीखी ......
इतना सुंदर
रंग परों का कहां से पाया ......
तू
किस स्कूल में पढ़ता  .......
सामने स्कूल का होमवर्क फैला
मैं सोंच रहा .......
क्या तूने अपना होमवर्क पूरा कर लिया ........
इतनी सुबह 
अपने घर से बाहर 
तू 
कैसे निकल पड़ा |

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