मैं दस
वर्षीय बच्चा हूं
मेरी
समस्याओं के लिए फुर्सत नहीं
माँ के पास
वह रसोईं में
व्यस्त है
पिता के पास
फुर्सत नहीं
वे आफिस से
थक कर लौटते हैं
शिक्षक के
पास फुर्सत नहीं
किसी छात्र
की व्यक्तिगत समस्याओं के लिए
मित्रों के
पास फुर्सत नहीं
वे व्यस्त
हैं अपने पैसे खर्च करने में कंटीन के अंदर
और मैं हर
शाम बैठ जाता हूँ मौन
घर के सामने
पार्क में
एक दिन एक
पिता आया
उसने मेरी
समस्या सुनी बड़े धैर्य से
हम दोनों
मित्र बन गये
एक दिन मेरे
बगल से गुजरती कार से
एक हाथ निकला
मैं कर के
अंदर खींच लिया गया
फिर मुझे होश
न रहा
आज मैं भटक
रहा हूँ बम्बई की सड़क पर
मेरे माता
पिता रोते होंगे मेरे लिए
भटक रहे
होंगे
परेशान होंगे
अब मैं अपनी
समस्या बताता नहीं किसी से
होटल में
प्लेटें धोता हूँ
पैसे जोड़ता
हूँ
पोस्ट आफिस
में
मैंने एक
पोस्ट कार्ड डाला है
पिता के पास
वे न आ पाए
तो मैं पहुंच जाऊंगा
उनके
पास |
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