शनिवार, 7 दिसंबर 2013

बच्चे की समस्या

मैं दस वर्षीय बच्चा हूं
मेरी समस्याओं के लिए फुर्सत नहीं
माँ के पास
वह रसोईं में व्यस्त है
पिता के पास फुर्सत नहीं
वे आफिस से थक कर लौटते हैं
शिक्षक के पास फुर्सत नहीं
किसी छात्र की व्यक्तिगत समस्याओं के लिए
मित्रों के पास फुर्सत नहीं
वे व्यस्त हैं अपने पैसे खर्च करने में कंटीन के अंदर
और मैं हर शाम बैठ जाता हूँ मौन
घर के सामने पार्क में
एक दिन एक पिता आया
उसने मेरी समस्या सुनी बड़े धैर्य से
हम दोनों मित्र बन गये
एक दिन मेरे बगल से गुजरती कार से
एक हाथ निकला
मैं कर के अंदर खींच लिया गया
फिर मुझे होश न रहा
आज मैं भटक रहा हूँ बम्बई की सड़क पर
मेरे माता पिता रोते होंगे मेरे लिए
भटक रहे होंगे
परेशान होंगे
अब मैं अपनी समस्या बताता नहीं किसी से
होटल में प्लेटें धोता हूँ
पैसे जोड़ता हूँ
पोस्ट आफिस में
मैंने एक पोस्ट कार्ड डाला है
पिता के पास
वे न आ पाए तो मैं पहुंच जाऊंगा
उनके पास |


  


            

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