गुरुवार, 26 दिसंबर 2013

सड़क पर चलना भला लगे

एक हाथ में पतला सा डंडा
और दुसरे हाथ में पोलीथिन की थैली लिए
प्रतिदिन दिखती थी
वह  महिला
एक दिन पड़ गयी मेरे सामने
और रुक गयी
अपने पुत्र और बहू की उपलब्द्धि गिना दिया उसने
बेटी का भी अच्छे घर ब्याह करना उसकी अपनी उपलब्द्धि थी
बेटी के सहारे बेटा बहू ले कर तीर्थ घूम आयी वह
आखिर बेटी का भी तो कुछ फर्ज है
पूछ बैठी ....
आपके घर में फूल का पेड़ नहीं है ...
सामने नौकरीपेशा महिला को पा
गिनाने लगी
अब वह अपनी मजबूरी ...
क्या करूं जमीन नहीं है मकान में
फूल कहाँ लगाऊं
फूल के बहाने चल लेती हूँ
पैर जम जायेगा घर में बैठ कर
मौसा नहीं हैं
घर में अच्छा कैसे लगे
नौकरी करती तो मित्र रहते
अकेली हूँ
भरे पूरे घर में
जी भी न लगे बुढ़ापे में
सड़क पर थोड़ी देर
किसी बहाने चलना भला लगे |

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