एक हाथ में
पतला सा डंडा
और दुसरे हाथ
में पोलीथिन की थैली लिए
प्रतिदिन
दिखती थी
वह महिला
एक दिन पड़
गयी मेरे सामने
और रुक गयी
अपने
पुत्र और बहू की उपलब्द्धि गिना दिया उसने
बेटी का भी
अच्छे घर ब्याह करना उसकी अपनी उपलब्द्धि थी
बेटी के
सहारे बेटा बहू ले कर तीर्थ घूम आयी वह
आखिर बेटी का
भी तो कुछ फर्ज है
पूछ
बैठी ....
आपके घर में
फूल का पेड़ नहीं है ...
सामने
नौकरीपेशा महिला को पा
गिनाने लगी
अब वह अपनी
मजबूरी ...
क्या करूं
जमीन नहीं है मकान में
फूल कहाँ
लगाऊं
फूल के बहाने
चल लेती हूँ
पैर जम जायेगा
घर में बैठ कर
मौसा नहीं हैं
घर में अच्छा
कैसे लगे
नौकरी करती तो
मित्र रहते
अकेली हूँ
भरे पूरे घर
में
जी भी न लगे
बुढ़ापे में
सड़क पर थोड़ी
देर
किसी बहाने
चलना भला लगे |
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