पत्नी वही
भाए
जो कमाए
बच्चे पैदा
कर घर भी बसाये
पति की
मनुहार करे
इसी में उसकी
सुरक्षा निहित है
बिलबिला कर
जब निकल पड़ती है
वह घर से
तब कहानियाँ
बनती हैं
उसकी
टूटी औलादों
की
आज वे परिवार
कहाँ
रिश्तों की
जगह नहीं घर में
बच्चे कैसे
पहचानें प्रेम
रिश्तों का
नौकरों से
सीखते वे
दुनियावी
पाठ |
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें