शनिवार, 14 दिसंबर 2013

शिक्षक चले मंथर गति से

सुधार सुधार बैठा तन
थक हारा मन
गाली दे
मनोबल गिरावै जग
क्या पढावें विद्यालय में शिक्षक
खाली गिनें पगार
ये भूले सब पाठ बिसरावे मुन्ना
जब घर में रिश्तों में
ठगी देखे पापा मम्मी के
दुकानदार से पर्ची में उलट फेर करा पापा
आफिस से कमायें एक्स्ट्रा मनी
ठोकें बंगला सुंदर सा
इमानदारी का पाठ पढावे मास्टर
और मान न पाए जग में .......
मुन्ना भी समझदार हो चला
छल बल कौशल से
मात्र डिग्री पाने को आतुर हो चला .......
थके शिक्षक को
बुद्धि ने जब पिलाई घुट्टी
भोर भोर वह मंथर गति से विद्यालय बढ़ चला |

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