सुधार सुधार
बैठा तन
थक हारा मन
गाली
दे
मनोबल गिरावै
जग
क्या पढावें
विद्यालय में शिक्षक
खाली गिनें
पगार
ये भूले सब
पाठ बिसरावे मुन्ना
जब घर में
रिश्तों में
ठगी देखे पापा
मम्मी के
दुकानदार से
पर्ची में उलट फेर करा पापा
आफिस से
कमायें एक्स्ट्रा मनी
ठोकें बंगला
सुंदर सा
इमानदारी का
पाठ पढावे मास्टर
और मान न पाए
जग में .......
मुन्ना भी
समझदार हो चला
छल बल कौशल से
मात्र डिग्री
पाने को आतुर हो चला .......
थके शिक्षक को
बुद्धि ने जब
पिलाई घुट्टी
भोर भोर वह
मंथर गति से विद्यालय बढ़ चला |
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