शनिवार, 7 दिसंबर 2013

शेरनी प्रसन्न हुयी

जिन्दगी भर उसने लिया न था कुछ
अपनी जिन्दगी अपने शर्तों पर जीने के बाद
अब घायल शेरनी सी चाट रही थी
अपने घावों को
सबसे छुपकर एक कोने में
उसके पंजों के निशां से शिकारी पहुंच गया था उस तक
पर पत्ते से लटकी चींटी ने काटा उसे
न जाने उसे कैसे
बंदूक का निशाना चूक गया
और घायल शेरनी उस पर टूट पड़ी
आज भोजन स्वयं चल कर आया था उसके पास .......
शेरनी प्रसन्न हुयी  |

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