एक जगह रम
जाने से
सम्बन्धों का
प्रेम
मकड़जाल बना लेता है
तब घुटने लगता
है स्व
और परेशान हो
मन आगे बढ़
निकलता है
भर पूर सांस
लेने को
आत्म मुग्धता
की अवस्था में
हम पाते हैं
अरे ! ........
कुछ जालों को
चिपके हुए
निज तन से
जो निकले ही
नहीं
वे सम्बन्ध
टूटे नहीं अब तक ....
उस पल एक अजीब
सी खुशी अनुभव होती है
लगता है
किसी को जरूरत हैं हमारी अब भी
और ये
जाल हमसे लिपटे
हमारे मित्र
बने रहते हैं
आजीवन साथ
रहते हैं
हमसे बातें
करते रहते हैं |
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