बुधवार, 4 दिसंबर 2013

सम्बन्धों के मकड़जाल

एक जगह रम जाने से
सम्बन्धों का प्रेम
मकड़जाल बना लेता है
तब घुटने लगता है स्व
और परेशान हो
मन आगे बढ़ निकलता है
भर पूर सांस लेने को
आत्म मुग्धता की अवस्था में
हम पाते हैं
अरे ! ........
कुछ जालों को चिपके हुए
निज तन से
जो निकले ही नहीं
वे सम्बन्ध टूटे नहीं अब तक ....
उस पल एक अजीब सी खुशी अनुभव होती है
लगता है
किसी को  जरूरत हैं हमारी अब भी
और ये जाल  हमसे लिपटे
हमारे मित्र बने रहते हैं
आजीवन साथ रहते हैं
हमसे बातें करते रहते हैं |



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