मुस्कुराना
गुनाह है तेरी बस्ती में
लो हम
मुस्कुराना भूल चले
जीना है किसी
के लिए
इसीलिये जी
लिए
किसी की
मुस्कुराहट में
मुस्कुरा
दिए
खिल खिलाना
मना था
सो खिलखिलाना
भूल चले
पांव में था
दम
सो चलते रहे
हम
चूँकि मन में
थी लगन
इसलिए नैन दीप
जलते रहे |
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