पति की आंख बंद होते ही
ससुराल की रानी बनी
श्री हीन
हुई अवहेलित
धनी ससुराल में
सास ससुर ने
मुंह फेरा
देवर देवरानी
का
चलने लगा
सिक्का
उसका पुत्र
बना गूंगा
मैका भला क्यों
पीछे रहे
ताने में
इतने बड़े घर
की बहू
है
वहीं रहे |
उसकी नौकरी ही
बनी सहारा उसकी
सहकर्मी बांटे
परेशानियां
मिला घर
पर
जितने मुंह
उतनी बात
हाय ! अकेली औरत
अकेले रहती
अलग
घर में ऐसा क्यों आखिर ?
जरूर कोई चक्कर !
............................
दिन बीते , मास बीते
बीते वर्ष
आज उसका
पुत्र
है
सरकारी कर्मचारी |
कितना कठिन
होता है
जीना
औरत के लिये
सतत करती वो
युद्ध
अपनों से
समाज के
नापाक इरादों से
आज वो महिला
है उदहारण
औरों की
जो जिंदगी भर
जली
स्व के लिये
आज
प्रिय पात्र है
पुत्र के
सहकर्मियों की |
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