रविवार, 16 सितंबर 2012

हाइकू - 31


भोर भई है
राह  दिख  रही  है 
जाग प्रिय तू |

स्याह  , सफ़ेद 
जीवन के दो पक्ष
जो चाहे चुन |

सोंच के बोलें
छूटे न निज कोई 
काल-चक्र में

धीरे चल रे !
विह्वल मन आज
तौल ले दम |

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