सोमवार, 24 सितंबर 2012

भोर - 1


भोर हुई !
हल्का उजाला फैला
खिड़की खोलते ही
नजर पड़ी
बोरा ले कर दौड़ रही है
एक चुननेवाली
हँसते हुए
उसके पीछे छोटा बोरा ले कर
दौड़ रहे हैं
उसके तीन और छ: वर्ष के बच्चे
खिलखिलाते हुए
कचरे में से खाली फेंके
डब्बों की तलाश में
कमाना है !
तभी तो आटा मिलेगा
रोटी बनेगी !
अभी सड़क खाली है
थोड़ी देर में सुबह की सैरवाले
चलने लगेंगे
चुननेवालों को
उनके निकलने से पहले
रास्ता खाली करना है
काश !
हम पंछी होते !
भोर होते ही
पेड़ की तलाश में निकल पड़ते
फल खाते
पेड़ पर बैठ |

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