मंगलवार, 18 सितंबर 2012

पेट्रोल ! पेट्रोल !


लाते तेल विदेश से
पानी जहाज द्वारा
कितनी मुद्रा देते हम विदेश
सोंचना हमारा काम नहीं
सरकार सोंचे |
पेट्रोल का दाम बढ़ा !
डीजल का मूल्य बढ़ा
गैस सिलिंडर पर नियंत्रण हुआ !
चिल्लाये हम
मंहगाई आई
ये तो सच है उतना
जितना
इन प्राकृतिक संसाधनों का
असंयमित प्रयोग |
हमारे जेब पर चोट पड़ी
हमारा चिल्लाना वाजिब है
मध्य वर्ग पर जब जब पड़ी है चोट
उसने निकला भी है नया रास्ता
रसोईं में जलते चूल्हे
सड़क पर दौडती गाड़ियां
न जाने क्यों
याद दिलाएं मुझे उन तेल कर्मचारियों का
जो शहर से दूर अथक परिश्रम करते
तेल शोधन करते
उनके परिवार के बारे सोंचना
हमारा काम नहीं
तेल कंपनी सोंचे |

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