सोमवार, 24 सितंबर 2012

छोटी कविताएँ - 7

       1


होय अजेय
वही
मानव
जो
जाने
कीमत समय की
धारण करे
स्वाभिमान का मुकुट
पूज्य
जिसे है नैतिकता |

    2

छोटा मकान
विहँस कर बोला .......
तुम क्या जानो मेरा दर्द
कैसे रहते मेरे अपने
एक कमरे में बनाते खाते सोते
सुबह निकल पड़ते
बाहर निज काम से
घर की वृद्धा डोलती रहती
झरोखे से ताकती
किसी सुखद भोर के आकस्मिक आगमन को .........
अट्टालिका ने अनसुनी कर बातें
जुल्फ झटका
और दूसरी तरफ देखने लगी |

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