मंगलवार, 4 सितंबर 2012

तांका - 5


ज्ञान लौ जली
तेरे स्पर्श से माता
नमन आज
सर्वप्रथम तुझे
तू ही मेरी गुरु है |

दमके रूप
पुत्री हिन्दी का देखो
लो बंधा विश्व !
सजाओ इसे तुम
बोलियों द्वारा आज |

: बजते ही
बारिश , बच्चे दौड़े
गुरु के घर
देख उनकी मस्ती
बादल हुआ फुर्र |

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