रविवार, 30 सितंबर 2012

छोटी कवितायेँ - 9


   
   उम्र 

उम्र जलती  
आलोकित करती
प्रसन्न कर हमें
हमारी राह जगमगाती
और उस राह पे
पीढ़ियाँ चलती |


    प्रेम रूठा

घर से रूठ
बाहर निकलते देख प्रेम को
दबे पांव
मुस्कुराते  हुए घृणा ने
कब
गृह प्रवेश किया
आदमी समझ ही पाया |


     


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