04
January 2015
07:46
-इंदु बाला
सिंह
बेटों के
शीतयुद्ध में
बुकुर बुकुर
उनका मुंह
ताकती
ओ
री माँ !
पिता ने तो
खुद को मजबूत कर लिया था
तूने क्यों न
मजबूत किया खुद को ..........
आजीवन सेविका
बनी रही
तू अपनों की.........
भला क्यों ?
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें