23
January 2015
08:20
-इंदु बाला
सिंह
कुछ तो कमी है
कहाँ कमी है
ठन्डे दिमाग से सोंचे हम
आखिर हम क्यों मारते बेटी को गर्भ में .........
और
कम उम्र बेटियां दिग्भ्रमित हो जाती ........
कभी हम उसे घर से निकालते
तो
कभी वह खुद निकल जाती हमारे घर से ..............
हमारे जी में कड़वाहट घुल जाता
हमारी चहकनेवाली बेटियों की उपस्थिति से
हमारे देखते ही देखते हमारे घर का रंग ढंग बदल जाता .........
आओ देखें हम
आज अपनी हथेली के रंग को
चिन्तन करें हम आज
और
बोयें हम आज
सही बीज
जेहन में अपने हम |
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