सोमवार, 19 जनवरी 2015

हॉउसवाईफ


19 January 2015
22:37
-इंदु बाला सिंह

उसके टूटे घर को देख
याद आया मुझे उसका अपना भरा पूरा घर
एक दिन कली आंधी में
खो गया था उसका जीवनसाथी
वह रह गयी खड़ी अपनी जगह अकेली
सब आगे बढ़ गये ........
माहौल बदला
रिश्ते बदले
बच्चो की दुनिया सजी
पर उसका महत्व कपूर की तरह उड़ गया
पल भर में देखते ही देखते वह बेजुबान मशीन बन गयी ..........
एक दिन उसने कहा था मुझसे -
काश ! मैं हॉउसवाईफ न होकर नौकरीपेशा होती
तो आज मेरे भी मित्र होते
मेरी भी अपनी जिन्दगी होती |


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