मंगलवार, 20 जनवरी 2015

जाड़े के दिनों में मुहल्ले की सड़क


20 January 2015
22:44
-इंदु बाला सिंह

सड़क पर से
एक बुजुर्ग महिला गुजरी
उसके सामने उसकी दो वर्षीय पोती चल रही थी ....
ओह !
इसके बेटे ने दूसरी जाति और भाषा की गरीब घर की लड़की ब्याह किया है
यह परिवार अजूबा है ........
एक और परिचित बुजुर्ग गुजरी सामने से
अरे !
इस महिला ने तो सिल्क की साड़ी पहनी है
क्या बात है
रोज तो अस्त व्यस्त सी फटीचर सूती साड़ी में घूमती है
कुछ तो बात है .........
और आंख के सामने उस महिला की बहू का चेहरा घूम गया
कुछ बुजुर्ग पार्क के गर्म बालू पर बैठ गये हैं
डायबिटीज से बचने के लिये भी
चलते हैं लोग ........
जाड़े के दिनों में
सुबह के दस बजे मुहल्ले की सड़क सूनी नहीं रहती
धूप से गरमायी सड़क साठ से उपरवालों की बन जाती है
तब पल भर को यूं लगता है
मानो सड़क की उम्र भी साठ से ऊपर हो गयी हो
अहा !
सड़क अब अनुभवी बन गयी है |

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