16
January 2015
07:26
-इंदु बाला
सिंह
माँ तेरे हाथ
का पका खाने को जी तरसता है
मैं
तो तेरा ही बेटा हूं .....
कहनेवाले वाले
बेटे ने पकड़ ली बैंक अकाउंट , जेवरों की फोटुयें अपनी मुट्ठी में
अरे !
ओ पितृसत्ता
के वाहक !
माँ को छाँव
की जरूरत होती है
समाज के हर
त्यौहार में आनन्द उठाने की चाह होती है
एरोप्लेन में
उड़ने और फाइव स्टार होटल में डिनर खाने की भी चाह होती है
माँ भी तेरी
ही तरह चहकना चाहती है
माँ एक ऐसी
उम्रदार इंसान होती है
जो तेरे सुख
के लिये अपने खो चुकी होती है
क्या गजब है
कि उसके लिये तेरे संसार में जगह नहीं ...........
माँ पूजनीय
पत्थर नहीं
वह समग्र गुण
दोषयुक्त लिंगभेद से पर एक इंसान भी होती
है
जिस दिन हम यह
महसूस कर लेंगे
उस दिन
कब्र में पैर
लटकायी माँ भी हमारी मित्र बन जायेगी |
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