शनिवार, 3 जनवरी 2015

गरीबी का माखौल


03 January 2015
10:52
-इंदु बाला सिंह

ठंड के मौसम में
अभावग्रस्तों को एक एक कर
स्टेज पर बुलाया .........
कम्बल ओढ़ाते हुये खिंचवाया तस्वीर
वह बड़ा आदमी  ........
उस बड़े आदमी के पीछे खड़े थे
और चार आदमी ............
अहा !
कम्बल बंटा
जाड़े के मौसम में ......
कल अखबार में सचित्र खबर छपेगी
गरीबों में
कम्बल बंटने की ...........
पर
ये कैसा माखौल था गरीबी का .....
अगर दयालू थे
वे सच में
तो
क्या रात में
हो मौन
खुले आकाश में सोये किसी अनजान ठिठुरते प्राणी को
चुपके से एक कम्बल ओढ़ा कर न चले जाते !
कोई देखे न देखे
पर
सर्वशक्तिमान हमें  देख रहा है ...
हमारे
इस दिखावे को परख रहा है
वह
हमारा मन पढ़ रहा है |



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