03
January 2015
09:23
-इंदु बाला
सिंह
पैसों से
बिकते
लोग देखे
घर के
नौकर देखे
बिके ठहाके
देखे
भूले बिसरे
अपने देखे
पर
न देखा
एक बार भी
ये अपना
जिद्दी मन बिकते
हैरान
हूं .....तू क्यों नहीं बिका .....
और
अकेला बैठा
बिसूरता रहा
परेशान हूं
...............
न जाने तू
किस मिट्टी का
है बना
बोल जरा तू
........
लगा न अपना
मोल |
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