शुक्रवार, 2 जनवरी 2015

बोल जरा


03 January 2015
09:23
-इंदु बाला सिंह

पैसों से बिकते
लोग देखे
घर के
नौकर देखे
बिके ठहाके देखे
भूले बिसरे अपने देखे
पर
न देखा 
एक बार भी
ये अपना जिद्दी मन बिकते
हैरान हूं .....तू क्यों नहीं बिका .....
और
अकेला बैठा बिसूरता रहा
परेशान हूं ...............
न जाने तू
किस मिट्टी का है बना
बोल जरा तू ........
लगा न अपना मोल  |

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