16
January 2015
21:41
-इंदु बाला
सिंह
यह कैसा
आकर्षण है
ज्ञान
का ....
धन का
भौतिक
सुख का ........
कि
हम दूर हो
जाते हैं
अपनों से
कभी दुसरे
राज्य में
तो
कभी दुसरे देश
में .........
जब जब घायल
होते हैं हम
शेर की तरह
अपने घाव को चाट कर खुद ही ठीक करते हैं
और
अकड़ कर खड़े
रहते हैं अकेले ही
यह कैसा वजूद
है हमारा !
जो
हमें अपनों से
दूर कर देता है ..........
त्याग के अभाव
में
बुजुर्ग के
प्रति सम्मान के कमी से
हमारा परिवार
चरमरा रहा है
आखिर क्यों ?
फुर्सत नहीं
सोंचने की हमें आज ..........
आफिस के ढेर सारे काम पड़े हैं न
हमारी मेज पे |
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