सोमवार, 5 जनवरी 2015

पैसे का रिश्ता


06 January 2015
07:29
-इंदु बाला सिंह


अठारह वर्ष की उम्र में  ही  अकेली हो गयी अपनी माँ का दुःख 
दो बेटियों की माँ  बनने पर 
अस्सी वर्ष की  वह भरे पूरे घर की महिला
न भूल पायी
मिलती थी जब वह मुझसे
उसका दिल रोता था अपनी माँ के लिये
माँ को मानसिक प्रतारणा देनेवाले
रंग बदले हुये माँ के सहोदरों को याद कर ........
और
मैं महसूसती थी उसका दर्द ......न जाने क्यों ?
एक दिन परेशान हो कर मैंने पूछा पैसे से ....
ओ पैसे !
तू आदमी की लाश की खाद पर बढ़ता है क्या
पर
मेरे प्रश्न को अनसुना कर उस ने
मुझसे मुंह फेर लिया  |

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